मंजिल

मंजिल कहा हे? किसी ने हमसे पूछा।
हमने भी ये कह दिया के वो बेवफा है, मिलती ही नही है।
तो उन्होंने भी पूछ लिया के तो क्यों पड़े हो उसके पीछे।
हम भी बहोत ढीट थे, कह दिया मिलना ना मिलना तो उसका भी हक है। 
बात आगे बढ़ी तो पूछे की डर ते नहीं नामोशी से?
दिल से जवाब आया की बदनाम तो हम थे ही अब चुपके क्यों जिए।
प्यार करते है उस से तो रास्तों की चुनौतियों से क्यों डरे।
हसके बोल चले हमसे पूछने वाले की क्या संदेश दे हम उसे(मंजिलको)?
बस कह देना की बेइमतिहा प्यार करता है दीवाना तुम्हे पाने के लिए।
बस भी कर इमतिहा लेना। मिल भी जा दीवाने को।
कितने इम्तिहा लेगी तू अब जिंदगी उसे पाने के लिए।
जिंदा तो रख उसे अमीक्ष को तुझे पाने के लिए।

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